सजी-धजी दुल्हन ने अपनी ही शादी में जमकर बजाया ‘ढोल’, पिता और पति ने भी दिया साथ

सोशल मीडिया पर दूल्हा-दुल्हन के

तमाम वीडियो देखे होंगे। लेकिन जब पब्लिक ने केरल की शादी का यह क्लिप देखा तो उनका दिन बन गया! इस वीडियो में एक दुल्हन अपनी ही शादी में बड़े जोश और उत्साह के साथ ‘ढोल’ बजाती नजर आ रही है। दरअसल, लड़की के पिता एक प्रोफेशनल चेंदा (Chenda) मास्टर हैं। युवती भी इस काम में प्रोफेशनल है। ऐसे में जब वह अपनी शादी में शिंकारी मेलम आर्टिस्ट के साथ चेंदा बजा रही थी, तो किसी ने वीडियो बना लिया और मामला वायरल हो गया। सबसे गजब है जब बेटी चेंदा बजा रही होती है और दूल्हा भी उसका साथ दे रहा होता है। तभी उसके पिता की एंट्री होती है, जिसके बाद माहौल जबरमस्त हो जाता है।

जब दुल्हन ने बजाया शादी में ‘ढोल’

वायरल क्लिप में एक युवती को दुल्हन के लिबास में बिंदास चेंदा बजाते देखा जा सकता है। इस दौरान उसकी खुशी और उत्साह का ठिकाना नहीं है। केरल की शादियों में चेंदा बजना बेहद आम है। लेकिन दुल्हन का ऐसा अंदाज कम ही देखने को मिलता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस दुल्हन का नाम शिल्पा है, जिसके पिता पेशे से एक चेंदा मास्टर हैं। वह कन्नूर (केरल) के रहने वाले हैं। लड़की भी इस इंस्ट्रूमेंट को बजाने में प्रोफेशनल है। तभी तो उसने अपनी शादी में जब चेंदा बजाना शुरू किया, तो वीडियो वायरल हो गया। बता दें, रविवार को शिल्पा की शादी देवानंद नाम के युवक से राजावल्साम ऑडिटॉरियम में हुई थी।

जोश और जुनून की हो रही है तारीफ

यह वीडियो ट्विटर हैंडल @LHBCoach से 26 दिसंबर को पोस्ट किया गया। उन्होंने कैप्शन में बताया- गुरुवायूर मंदिर में आज एक विवाह समारोह था। दुल्हन के पिता चेंडा मास्टर हैं। बेटी अपने पिता के साथ उत्साह से इस इंस्ट्रूमेंट को बजाती है, जो अंत में उसका साथ देने पहुंचते हैं। और हां, दूल्हा भी इसमें शामिल होता नजर आता है। इस क्लिप को खबर लिखे जाने तक 1 लाख 69 हजार से ज्यादा व्यूज और 10 हजार से ज्यादा लाइक्स मिल चुके हैं। साथ ही, तमाम यूजर्स ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए दुल्हन के जोश और जुनून की तारीफ की है।

क्या होता है चेंदा?

चेंदा लकड़ी से बना एक खोखला बेलनाकार ढोल होता है, जिसके दोनों तरफ के मुख मोटे चर्मपत्रों से ढके हुए होते हैं, जो छोर से मोटे लचीले चमड़े के फंदों से बंधे होते हैं। इसे कमर से नीचे लटकाया जाता है, और दो घुमावदार लकड़ी की छड़ियों से बजाया जाता है। यह केरल के कथकली नृत्य के साथ अनिवार्य संगत है। इतना ही नहीं, इसका उपयोग मंदिर के अनुष्ठानों, शादी-ब्याह जैसे खास मौकों पर भी किया जाता है।

इस दृश्य ने पब्लिक का दिल जीत लिया!

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